शाम ढलते ही जामा मस्जिद और उसके आसपास का इलाका आजकल हो जाता है ‘मेले’ में तब्दील

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नई दिल्ली (संवाददाता)। शाम ढलते ही जामा मस्जिद और उसके आसपास का इलाका आजकल ‘मेले’ में तब्दील हो जाता है। मेले की जो खासियतें होती हैं, वह इस इलाके में नजर आती हैं। कहीं गरमा-गरम व्यंजन मिल रहे हैं तो दुकानों से खरीदारी हो रही है। अलसुबह तक यह इलाका गुलजार रहता है और यहां आने वाले लोग खासा सुकून पाते हैं।

इस मुस्लिम बहुल इलाके की रातें आजकल देखते ही बनती है। आखिर हो भी क्यों न। रमजान के दिन जो चल रहे हैं। उसके चलते इलाके की दिनचर्या पूरे तौर पर बदल चुकी है। जामा मस्जिद, मटिया महल, चितली कबर, चूड़ी वालान, इमली वालान जैसे इलाके दिन-भर ऊंघते नजर आते हैं। वैसे तो वहां पर अधिकतर दुकानें खुली नजर आती हैं, लेकिन वहां ग्राहक कम ही होते हैं। इसके बावजूद दुकानदार खासे व्यस्त नजर आते हैं।

उसका कारण यह है कि वे रात को इलाके में आने वाले लोगों के लिए सामान तैयार कर रहे होते हैं। इफ्तार का वक्त होते ही रोजा खुलने के बाद इलाके का माहौल बदलने लगता है और यहां के बाजारों के अलावा गली-मुहल्लों तक में भीड़ का आलम देखने लायक होता है। ‘मेले’ में तब्दील होते यहां के बाजार रोशनी में नहाए नजर आते हैं और रात होते-होते लोगों की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि वहां कंधे से कंधा टकराता दिखाई देता है।

इन मुस्लिम बहुल इलाकों में रात को दो चीजें सबसे अधिक नजर आती है। खाने-पीने के सामान की बिक्री और कपड़ों आदि की खरीददारी। खाने-पीने का अधिकतर सामान मांसाहारी है, वैसे तो शाकाहारी व्यंजन भी बाजारों में बिकते नजर आते हैं, लेकिन उनकी संख्या काफी कम है। नॉन-वेज खाने वाले लोगों के लिए तो स्वर्ग में तब्दील हो जाता है ये इलाका। कहीं देग में बिरयानी और हलीम बेची जा रही है तो कहीं कबाव भूने जा रहे हैं।

फिश और चिकन फ्राई की तो अनेक दुकानें नॉन-वेजिटेरियन लोगों को खासा लुभाती हैं। इलाके के पूर्व पार्षद खुर्रम इकबाल के अनुसार भारी भीड़ के बावजूद बाजारों में अनुशासन नजर आता है। उसका कारण यह है कि अधिकतर लोग रोजेदार होते हैं। ये लोग रोजे के चलते दिन-भर तो धार्मिक कामों आदि में बिजी रहते हैं और शाम ढलते ही बाजारों की ओर रुख कर जाते हैं।

अगले हफ्ते चूंकि ईद है। इसलिए अन्य सामानों की भी खूब खरीदारी की जा रही है। कुर्ते-पजामे से लेकर पाकिस्तानी बुर्के भी खूब बिक रहे हैं। कहीं चूड़ियां खरीदी जा रही हैं तो कहीं पर घर को सजाने का सामान खरीदा जा रहा है। चितली कबर इलाके में सालों से पाकिस्तानी बुर्के और सूट-दुपट्टा बेच रहे रईस इलियासी के अनुसार इलाके में इनकी डिमांड बहुत अधिक है। इनके डिजाइन और कलर कुछ अलग होते हैं।

इसलिए महिलाएं खरीदने के लिए खूब आती हैं। इलाके में कुर्ते-पजामे की एक दाम वाली दुकान भी बहुत मशहूर है। यहां खरीददारी करने आए मोहम्मद यामीन के अनुसार चिकन के कुर्ते और उसके शानदार डिजाइन इस दुकान की खासियत है। यहां मोल-भाव को लेकर झिकझिक भी नहीं करना पड़ता। इस तरह रात-भर खानपान और खरीददारी चलती है। सहरी होने से एक घंटा पहले बाजार की रौनक घटने लग जाती है।

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