कंपनियों से नहीं मिल रहे आर्डर, खड़े हो गए 13 हजार वाहन

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फरीदाबाद (ममता चौधरी)। जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) लागू होने के बाद कंपनियों से आर्डर न मिलने के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार को बड़ा झटका लगा है। फरीदाबाद की करीब 13 हजार से अधिक गाड़ियों के पहिए थम गए हैं। कंपनी से माल न निकलने के कारण गाड़ियों की बुकिंग नहीं हो रही है।
इससे एक जुलाई से रोज ट्रांसपोर्टर्स को करीब 5 करोड़ से अधिक की चपत लग रही है। इसके अलावा जीएसटी लागू होने से पहले जो गाड़ी दूसरे राज्यों में गई हैं, वे वहीं फंसकर रह गई हैं। अब ट्रांसपोर्टर्स ने इस समस्या से निदान के लिए पीएम और सीएम को चिट्‌ठी लिखी है। ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार जल्द कंपनियों ने माल इधर-उधर भेजना शुरू नहीं किया तो यह कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।
शहर में 10 हजार गाड़ियां खड़ी:
ट्रांसपोर्टनगर के अलावा शहरभर में इधर-उधर करीब 10 हजार गाड़ियां एक जुलाई से खड़ी हैं। 14 दिन बीत जाने के बाद भी इन्हें किराए पर लेने वाले आगे नहीं आ रहे हैं। इस कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ऑल फरीदाबाद ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरेश शर्मा के अनुसार सरकार को पहले एक राज्य में ट्रायल के तौर पर जीएसटी लागू करना चाहिए था। इसके परिणाम देखने के बाद ही अगला कदम उठाया जाता। अब ट्रांसपोर्ट कारोबार प्रभावित हो रहा है।
क्यों हो रही है परेशानी :
मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन फरीदाबाद (एमएएफ) के महासचिव रमणीक प्रभाकर के अनुसार अभी जीएसटी कारोबारियों की समझ से परे है। हर चीज पर टैक्स का आंकलन भी नहीं किया जा सकता। कंपनियों में नई बिल बुक बनवाई जा रही हैं। कई माल ऐसे हैं, जिन्हें खरीदने से इनकार कर दिया गया है, क्योंकि कंपनी मालिक अब जीएसटी लगाकर माल देना चाहते हैं, जबकि खरीदने वाले इसे पुराने रेट से लेना चाह रहे हैं। इसलिए कंपनियों में माल अटा पड़ा है। कंपनी मालिक फिलहाल माल इधर-उधर न भेजकर इंतजार कर रहे हैं। कारोबारी उम्मीद कर रहे हैं शायद छह माह में हालात कुछ ठीक हो जाएं। उनकी सरकार से मांग है कि एजुकेशन से संबंधित सभी चीजों को टैक्स फ्री किया जाए, क्योंकि सरकार ने बच्चों के रजिस्टर व ड्रॉइंग कॉपी पर भी 18 फीसदी टैक्स लगा दिया है।
एक गाड़ी पर 4 हजार की बचत:
ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार एक गाड़ी पर करीब 4 हजार रुपए की बचत होती है। इस समय करीब 13 हजार गाड़ियां एक जुलाई से खड़ी हैं। इस हिसाब से रोज 5 करोड़ से अधिक का नुकसान हो रहा है। ट्रांसपोर्टर्स के अनुसार काम न होने से इस समय ड्राइवर व कंडक्टर सहित अन्य स्टाफ को तनख्वाह देना मुश्किल हो रहा है।
ट्रांसपोर्ट नगर अविकसित : 
महासचिव कौशिक के अनुसार सेक्टर-58 ट्रांसपोर्ट नगर अभी पूरी तरह से विकसित नहीं है। एरिया काफी छोटा है। इसलिए ट्रांसपोर्टरों की सभी गाड़ियां खड़ी नहीं हो पातीं। सरकार ने सेक्टर-61 में दूसरे ट्रांसपोर्ट नगर को बसाने का वादा किया था लेकिन वहां धीमी गति से काम चल रहा है। वहां पार्किंग काफी बड़े क्षेत्र में है। इसलिए परेशानी नहीं होगी। वह इस बारे में हुडा अधिकारियों से कई बार मिल चुके हैं लेकिन अभी तक काम कंप्लीट नहीं हुआ है। अब जीएसटी के दिनों में ट्रांसपोर्टर्स को दोहरी समस्या झेलनी पड़ रही है।
अब आगे क्या होगा :
उद्योगपति रमणीक प्रभाकर के अनुसार अब अधिकतर कंपनियां नया माल बनाना बंद कर रही हैं, क्योंकि पुराना स्टॉक ही नहीं उठ पा रहा है। थोक विक्रेता पुराने रेट पर अड़े हैं। संभावना है अब जरूरी चीजों की मारामारी होगी। इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम से लेकर भारी चीजों को लेने के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ेगा। मोबाइल आइटम भी बाजार में धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। इसलिए अब आमजन को परेशानी झेलनी होगी।
कौन सा मॉल होता है लोड:
फरीदाबाद औद्योगिक नगरी है। यहां हजारों की संख्या में कंपनियां हैं। इनमें जेसीबी, एस्कॉर्ट्स, यामाहा, व्हर्लपूल सहित अन्य बड़ी कंपनियां भी हैं। इन कंपनियों से बड़ी गाड़ियों में विभिन्न प्रकार की मशीनरी, ट्रैक्टर, जेसीबी, हाईड्रा, फ्रीज सहित अन्य सामान लोड होता है। इसके अलावा नोएडा में सैमसंग की कंपनी है, यहां से गाड़ियां वहां माल लोड कर देश के वििभन्न हिस्सों में पहुंचाती हैं।

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