विश्व के प्रथम सामूहिक पितृ गायत्री महायज्ञ का दूसरा चरण सम्पन्न

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फरीदाबाद 26 फरवरी। भूमंडल में अचानक से आने वाली प्राकृतिक आपदाओं को शांत करने के लिये फरीदाबाद सैक्टर 16 के श्री अद्भुत धाम हनुमान मंदिर में समस्त विश्व की शांति हेतु सामूहिक पितृ गायत्री महायज्ञ का दूसरा चरण सम्पन्न किया गया। ये महायज्ञ देश में ही नहीं बल्कि पूरे भूमण्डल में पहला ऐसा महायज्ञ हैं जिसमें अपने पितृों के लिये त्रिपिण्डी श्राद्ध किया जा रहा है। इस सामूहिक महायज्ञ के दूसरे चरण में 51 भक्तों ने हिस्सा लिया, जिनसे पंडितों ने एक साथ मंत्राच्चरण के साथ श्राद्ध करवाया। दूसरे चरण के महायज्ञ में मुख्यअतिथि के रूप में केबिनेट मंत्री विपुल गोयल को आमंत्रित किया गया था मगर व्यस्तता के चलते वह महायज्ञ में सम्मलित नहीं हो पाये जिनकी अनुपस्थिति में मंत्री के भतीजे अमन गोयल ने महायज्ञ में शिरकत की और हवन कुंड में आहूति डालकर अपने आपको भी महायज्ञ में शामिल किया। इस पितृ गायत्री महायज्ञ के करने से लोगों के जीवन से पितृदोष का निवारण होता है। महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने बताया कि ये महायज्ञ 9 माह तक प्रत्येक महीने की अमावस्या को किया जायेगा। इसका समापन अश्वनी माह में श्राद्धों के समय पूरा किया जायेगा। आज के महायज्ञ के बाद भक्तों के प्रसाद के रूप में भंडारे का आयोजन भी किया गया है जिसमें सैंकडों लोगों महायज्ञ का प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि अपने पूर्वजों को विस्मृत कर देने से ही पितृ दोष पैदा होते हैं। माघ मास देव मास है और अश्वनी मास पितृ मास। माघ अमावस्या से नौ महीने तक प्रत्येक मास अमावस्या को इस यज्ञ का आयोजन होगा जो अश्वनी मास में सम्पन्न होगा। इन नौ महीने के दौरान देश-विदेश के श्रद्धालु हिस्सा लेंगे। इस  समारोह में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या को तर्पण कर अपने पूर्वजों का पिंड दान किया ।
51 भक्तों सहित मंत्री के भतीजे अमन गोयल ने महायज्ञ में डाली आहूति
इस आयोजन के बारे में अधिक जानकारी देते हुए महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने बताया कि आयोजन को त्रिपिण्डी श्राद्ध भी कहते हैं। इसका अर्थ है पितामह, परपितामह और प्रद्ध परपितामह की गति प्राप्त करवाने हेतु करवाया जाता है, साथ ही आज दुनिया में प्राकृतिक आपदायें आ रही हैं कहीं बादल फट जाता है तो कहीं धरती धस जाती है तो कहीं अचानक से जंगलों में आग लग जाती इन्हीं प्राकृतिक आपदाओं से बचने के लिये इस सामूहिक पितृ गायत्री महायज्ञ का समय समय पर होना आवश्यक है। इसलिये उन्होंने फेंसला लिया है कि 9 माह तक प्रत्येक महीने की अमावस्या को पितृ गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया जायेगा। इसका समापन अश्वनी माह में श्राद्धों के  समय किया जायेगा। इससे पहले प्रथम चरण 27 जनवरी को दशहरा मैदान में भव्य तरीके से दूर दराज आये महान संतों द्वारा करवाया गया था। जिसका तीसरा चरण आगामी 28 मार्च को किया जायेगा।
इस महायज्ञ का आयोजन महंत श्री लक्ष्मीनारायण जी महाराज पीठाधीश्वर ने करवाया, जिसमें वाराणसी से आचार्य ब्रह्मदेव, वाराणसी से सुरेन्द्र पाण्डेय, इलाहाबाद से आचार्य उमाशंकर, आचार्य विवेक, आचार्य कैलाश चन्द्र, चित्रकूट से ओमप्रकाश, और नासिक, गया, वृद्धावन,  जैसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों से दर्जनों आचार्यों सहित शहर के समाजिक व्यक्ति संत गोपाल, आरडब्ल्यूए सैक्टर 16 ए के प्रधान, अरूण गोपाल, सतीश कौशिक, प्रह्लाद शरण, गोयल, विनय गुप्ता, ब्रज गोपाल, मोहित शास्त्री, दिनेश भाटिया, प्रेम गोयल, और अशोक गोयल ने हिस्सा लिया।

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